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जिले में हुई अतिवर्षा उपरांत वैज्ञानिकों ने किया फसल स्थिति का निरीक्षण

शिवपुरी:-रुद्र जैन



शिवपुरी विकासखण्ड के विभिन्न ग्रामों बीलारा, सिरसौद, सिंहनिवास, ठर्रा, रातौर इत्यादि में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों डॉ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह एवं डॉ. एम.के. भार्गव एवं सहायक बीज प्रमाणीकरण अधिकारी श्री पी.पी.शर्मा द्वारा किया गया। भ्रमण किये गये क्षेत्र में सोयाबीन, मूंगफली, टमाटर, कद्दू, धान, उड़द, अजवाइन, तिल इत्यादि फसलों का अवलोकन किया गया। अवलोकन में कृषकों द्वारा कीटों के प्रकोप के संबंध में शंका का समाधान करते हुए उन्हें अवगत कराया गया है कि सोयाबीन एवं मूंगफली की फसल में वर्तमान में कीट-व्याधि का प्रकोप फसल में आर्थिक हानिकारक स्तर से कम एवं नगण्य है। अतः अनावश्यक रूप से कीटनाशक दवाओ का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है। भविष्य में कीटों का प्रकोप बढ़ने पर (प्रति मीटर 2 से 3 कीट इल्लियां) बढ़ने पर ही कीटनाशक दवाओं का उपयोग करें। भ्रमण के दौरान ग्राम बिलारा के कृषक धीरज सिंह यादव द्वारा सोयाबीन (जे.एस.95-60) फसल के लिये गये बीजोत्पादन कार्यक्रमम वाले खेत पर उनके द्वारा बतलाई जा रही अफलन की शंका का समाधान किया गया। सोयाबीन फसल में गर्डल बीटल प्रभावित पौधों की संख्या बढ़ने पर थायोक्लोप्रिड 750 मिली./हैक्टर 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने का परामर्श भी दिया। इसके साथ ही कृषकों को अवगत कराया गया कि फसल स्थिति में धूप निकलने से सुधार होगा तथा नमी के उचित स्तर आने पर निराई-गुड़ाई, जलविलेय उर्वरकों का छिड़काव एवं खरपतवारों विशेषकर गाजरघास का उन्मूलन करने की आवश्यकता है। 


धान की फसल के लिए तैयार कर रहे कृषकों के खेतों में पाया गया कि किसान खेत में मचौआ करते समय आधार खाद का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। आधार खाद के रूप में नत्रजन की आधी मात्रा, फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा का धान फसल में उपयोग करने हेतु कृषकों को सलाह दी गई। साथ ही अंकुरण पूर्व शाकनाशी बेनसल्फ्यूरॉन एवं प्रेेटिलाक्लोर संयुक्त पूर्व मिश्रित दानेदार दवा की 10 कि.ग्रा. मात्रा प्रति हैक्टर के मान से फसल की रोपाई के 02 से 03 दिन उपरांत भुरकाव करें। यह दवा न मिलने पर फसल की 25 से 30 दिन की अवस्था पर बिषपायरीबेक सोडियम की 250 मि.ली. मात्रा प्रति हैक्टेयर उपयोग करने का भी सुझाव दिया गया। 

टमाटर में कालापन आने पर मेंकोजेब और कार्बन्डाजिम की संयुक्त पूर्व मिश्रित दवा की 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी के मान से छिड़काव करने के लिए सुझाव टमाटर उत्पादक कृषकों को दिया गया। कृषकों से खेत में निचले भाग में एकत्रित हो रहे पानी की निकासी वर्षा की स्थिति में करने का भी सुझाव दिया गया।

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