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आषाढ़ की हरियाली अमावस्या के पर्व पर उत्तर एवं दक्षिण के दोनों तटों पर नर्मदा भक्तों का उमड़ा जनसैलाब

हरदा से अनिल मल्हारे की रिपोर्ट

हरदा:-




 हंडिया कोरोना काल की पहली अमावस्या एवं आषाढ़ की हरियाली अमावस्या के शुभ अवसर पर कोरोना काल में छूट के चलते हजारों की संख्या में नर्मदा भक्तों ने नर्मदा के पवित्र जल में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया एवं भगवान रिधनाथ एवं सिद्धनाथ महादेव पर जलाभिषेक पूजन कर अच्छी बारिश एवं फसल की कामना की

हलहरिणी अमावस्या पर, पितरों के तर्पण के साथ दान- तीर्थ स्नान करने से मिलता है मनवांछित फल वर्षा ऋतु में आषाढ़ अमावस्या हर साल अच्छी फसल की उम्मीद बंधाती है, इस कारण यह हलहरिणी अमावस्या भी कही जाती है, इस अमावस्या पर तर्पण से पितृ प्रसन्न होते हैं और खेतिहरों के बीच हल-खेती उपकरणों के पूजन का विशेष महत्व है आषाढ़ अंत से बरसात शुरू हो जाती है, इस माह में चतुर्मास की शुरुआत होती है, इस दिन पवित्र नर्मदा में स्नान कर सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है, आषाढ़ अमावस्या पर दान-पुण्य, स्नान और पितृ तर्पण से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, यूं तो अमावस्या तिथि हर महीने कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को होती है लेकिन हिन्दी पंचाग के चौथे माह यानी आषाढ़ में पडऩे वाली इस तिथि को विशेष रूप से पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और स्नान-दान के लिए उत्तम माना गया है, अमावस्या की शाम पीपल पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीया जलाकर पितरों को स्मरण करना चाहिए। अमावस्या के इस अवसर पर सभी घाटों पर - सुबह से ही पुलिस बल एवं होमगार्ड के जवान तैनात थे

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