Header Ads

test

चम्बल के बेहड़ों से राजधानी तक का सफर : स्वामी ओमानन्द

  श्रीगोपाल गुप्ता



ताजपुर उत्तमपुरा एक छोटा और जिले के लिये ही अंजान गांव जो मुरैना जिले की जोरा तहसील अन्तगर्त थाना देवगढ़ में ठीक बेहड़ों के बीच चम्बल की गोद में स्थित है! यहां के एक शिशु ने सफलता का सौपान चढ़ते हुए पहले मुरैना और अब राजधानी भोपाल में मुरैना की सफलता के झंडे गाड़ दिये! सन् 1984 में इस गांव के एक गरीब कृषक परिवार में जन्मे और मात्र 7 साल की आयु में बाल ब्रह्मविचारी का संकल्प लेकर संतों के साथ पैदल भारत भ्रमण करने वाले स्वामी ओमानन्द को ग्रह मंत्रालय ने मप्र.राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का राज्य का समन्वय अधिकारी(नोडल आॅफीसर ) मनोनित किया है जो वाकई जिला वासियों के लिये गर्व की बात है!बचपन में बाल ब्रह्मविचारी का संखल्प लेने के उपरांत  हरिओमपुरी महाराज से लेकर 2018 में स्वामी ओमानन्द के नामांकरण तक का उनका सफर काफी संघर्षमय और गायों की रक्षा के लिये समर्पित रहा! बचपन में सन्यास के पश्चात पैदल भारत भ्रमण के बाद गांव लोटे स्वामी ओमानन्द ने निपट चम्बल के बेहड़ों व तट के बीच ताजपुर गांव में मौजूद देवस्थान पर मंहत के रुप में कठोर तपस्या व साधना और गायों की भारी सेवा की! राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा से ओतप्रेत पुरी जी इस बीच जब-तब मुरैना आते थे तो सड़कों पर लड़खड़ाती और दम तोड़ती लावारिस गायों की दुर्दशा पर दुखी हो जाते थे! उनको अपने लोगों से ये जानकारी भी मिलती थी कि बहुत सी हष्ट-पुष्ट गौधन को गौकसी करने वाले तस्कर ट्रकों में भरकर कसाई खानों में ले जाते हैं और जिंदा ही काटकर गोस्त में तब्दील कर भारी मुनाफा कमाते हैं। इससे व्यथीत होकर गायों की रक्षा के लिये स्वामी जी ने ताजपुर देवस्थान छोड़कर मुरैना में ही डैरा डाल दिया!


सन् 2012 में स्वामी जी एक गऊ सेवकों एक टीम घठित कर मुरैना व मुरैना के रास्ते गौकसी के लिये ट्रकों में कूड़ों की तरह लादकर ले जाने वाले ट्रकों और तस्करों को पकड़ने का जोखिम भरे काम को अंजाम देना शुरु किया! अब ऐसी गायों को बचाये रखने के लिये स्वामी जी के नेतृत्व में टीम ने खाली पड़ी पुराने बस स्टैण्ड की सरकारी जमीन को गऊशाला में परिवर्तित किया और तस्करों के खिलाफ मामले दर्ज करवाये!तस्करों से छुड़ाई गायों के साथ-साथ सड़कों पर खुलेआम लावारिस घूमकर चोटिल होते गाय व साड़ों को भी यहां गौशाला में सुरक्षित रखने का काम किया!अब इन गोवंशों के खाने के लिये भूसे का इंतजाम स्वामी जी और उनकी टीम ने दानदाताओं से चंदा,भूसी,बासी रोटी,पीना आदि लेकर किया! बाद में टीम के निस्वार्थ गौ सेवा को देखते हुए और स्वामी जी और टीम के प्रयासों से मप्र की शिवराज सिंह सरकार ने गौशाला के संचालन के लिये हरीओम पुरी और टीम के मार्गदर्शन में नगर पालिक निगम को सोंप दिया!इसी बीच स्वामी जी व टीम के सदस्यों की निशपच्छ गवाहियों के कारण कई  ट्रकों को माननीय न्यायलयों से राजसात करने और आरोपियों 7-7 सालों के कठोर दण्डों से दण्डित किया गया! हरिओमपुरी महाराज की गौ भक्ति के कारण प्रशासन द्वारा उन्हे जिले की सभी गौशालाओं का नोडल अधिकारी बनाया गया!सन् 2018 हरिओम पुरी अपने पूज्य गुरु कल्याण दास जी के बुलावे पल हिमालय की तलहटी में बसे गुरु जी के विशाल आश्रम में पहुंचे! यहां आश्रम में गुरु जी द्वारा "सन्यासी दीक्षा" दी गई और इसके साथ ही उनका नया नामांकरण स्वामी ओमानन्द के रुप में किया गया!दीक्षा के बाद उन्हे एम एल ए गेस्ट हाऊस भोपाल के सामने स्थित कात्यानी शक्तीपीठ आश्रम के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई! उन्हें संस्था के  ओमकारेश्वर व अमरकंटक स्थित आश्रमों की जिम्मेदारियों से नवाजा गया! इसके साथ ही उन्होने देवरी स्थित गौशाला का संचालन छोड़ दिया और भोपाल आश्रम को अपना डेरा बना लिया!अब उनको ग्रह विभाग मप्र ने आपदा अधिनियम के तहत 2007 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बने प्रदेश आपदा प्राधिकरण में सवन्वय अधिकारी बनाया है, जो चम्बलाचंल के लिये गर्व का विषय है!इसके साथ ही स्वामी ओमानन्द ने चम्बल के बेहड़ों से राजधानी भोपाल तक का सफर गौधन के प्रति अपने प्यार और समर्पण से तय किया है!

कोई टिप्पणी नहीं