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सुनेत्रा भाभी के पट्टाभिषेक की हडबडी

 ग्वालियर :-@ राकेश अचल 


महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख अजित पवार के असामयिक निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है.उनके जाने के बाद  उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार  (सुनेत्रा भाभी ) का राजनीतिक पट्टाभिषेक करने यानि उन्हे उपमुख्यमंत्री बनाये जाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं..लेकिन मै निजी तौर पर सुनेत्रा भाभी से अपील करूंगा कि वे महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री के आफर को ठुकरा कर एक नयी मिसाल पैदा करें।

राजनीति में परिवारवाद का हर दल में विरोध होता है किंतु हर दल परिवारवाद का संरक्षण भी करता है. भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा या एनसीपी भी अपवाद नहीं हैं. अजित पवार की चिता की राख अभी ठंडी नहीं हुई है और उनके उत्तराधिकार को लेकर हलचलें तेज हो गई हैं।

अजित पवार की एनसीपी के नेता नरहरि जिरवाल ने कहा, "अजित पवार का उत्तराधिकारी सुनेत्रा भाभी को होना चाहिए. सभी को लगता है कि अब सुनेत्रा भाभी ही राष्ट्रवादी पार्टी की बागडोर संभालेंगी. "सवाल ये है कि विधायक, सांसद या मंत्रिमंडल में कोई पद क्या उत्तराधिकार के लिए बना है? क्या राजनीतिक दल कोई प्रतिष्ठान है या कोई धार्मिक पीठ है जो कुछ दिन रिक्त नहीं रह सकती? लोकतंत्र में पट्टाभिषेक का कोई प्रावधान नहीं है फिर भी ऐसा होता है. हो रहा है. और अगर इसका प्रतिकार न किया गया तो आगे भी होगा।

देश की एक प्रधानमंत्री की हत्या होती है तो उनके बेटे को प्रथानमंत्री बना दिया जाता है. एक मंत्री का निधन होता है तो उसके बेटे को लोकसभा या राज्यसभा में भेजकर मंत्री बना दिया जाता है. कहीं, कोई विरोध नहीं. कहीं, कोई आवाज नहीं. सुनेत्रा भाभी के लिए भी ये सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है कि वे महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री बन जाएं. मुमकिन है कि वे बनें भी।

सुनेत्रा भाभी कोई सोनिया गांधी नहीं हैं जो अपना अघोषित राजनीतिक उत्तराधिकार त्याग दें. उनके भी बाल-बच्चे हैं. अरबों का साम्राज्य है. सत्ता का परित्याग कर इस साम्राज्य का संरक्षण कैसे मुमकिन है? फिर मजबूरी ये है कि पवार की पार्टी किसी पटेल या जिरवाल को तो सौंपी नहीं जा सकती. उसे तो कोई पवार ही चाहिए।

लगता है कि सरकारी नौकरियों की ही तरह सियासत में भी अनुकम्पा नियुक्ति का अघोषित प्रावधान है. इसीलिए जब  भी किसी मंत्री, सांसद या विधायक का निधन हो तो रिक्त स्थान पर  मृतक की पत्नी, बेटे, बेटी यहाँ तक कि भतीजी, भतीजे तक को अनुकम्पा में टिकट और पद दे दिया जाता है. इस मामले में सभी राजनीतिक दलों में मतैक्य है. बिना मेजें थपथपाए ही मौन रहकर इस अनुकम्पा का समर्थन किया जाता है.विरोध का तो सवाल ही नहीं है।

महाराष्ट्र में उप मुख्यमंत्री रहे अजित पवार की विमान हादसे में मौत के तत्काल बाद सत्तारूढ दल और गठबंधन में शामिल सभी दल सुनेत्रा भाभी के प्रति संवेदना से भरे हुए हैं और चाहते हैं कि उन्हे बिना एक पल गंवाए उप मुख्यमंत्री बना देना चाहिए. शायद सभी को लगता है कि यदि सुनेत्रा भाभी को उप मुख्यमंत्री न बनाया गया तो कहीं उनका परिवार कही भुखमरी का शिकार न हो जाए।

श्रीमती सुनेत्रा पवार के लिए भी श्रीमती सोनिया गांधी की तरह पद ठुकराना आसान नहीं है. वे प्रस्ताव आएगा तो उप मुख्यमंत्री पद सहर्ष स्वीकार करेंगी. सुनेत्रा भाभी को उप मुख्यमंत्री पद तश्तरी में रखकर भेंट करना भाजपा की भी विवशता है.भाजपा जानती है कि यदि भाभी की उपेक्षा की गई तो गठबंधन और सत्ता खतरे में पड सकती है और सत्ता कोई खोना नहीं चाहता।

एनसीपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल ने अभी सुनेत्रा भाभी को उप मुख्यमंत्री बनाने के किसी प्रस्ताव की पुष्टि नहीं की है क्योंकि इस पद को लेकर लड्डू फूट रहे हैं और ये स्वाभाविक भी है.कुल मिलाकर, राजनीतिक हलकों में अजित पवार के उत्तराधिकारी को लेकर बहस जारी है, वहीं सुनेत्रा पवार के नाम पर चर्चा तेज़ हो गई है।

राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार कई सालों से सक्रिय राजनीति से दूर रहीं, लेकिन वह हमेशा बारामती के चुनावी अभियानों में पर्दे के पीछे से प्रेरक शक्ति बनी रहीं.आपको बता दूं कि साल 2019 के चुनावों में  दिवंगत अजित पवार के पुत्र पार्थ पवार ने मवाल से लोकसभा चुनाव लड़ा और पवार परिवार के भीतर विवाद को लेकर चर्चा शुरू हो गई.पार्थ के चुनाव लड़ने के विरोध को लेकर पवार परिवार में मतभेदों की चर्चा थी, लेकिन सुनेत्रा भाभी ने उसका खंडन किया.. 

अपने बेटे पार्थ पवार के मावल से लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद सुनेत्रा पवार ने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू किया. साल 2024 में. उन्होंने अपनी ननद सुप्रिया सुले के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव लड़ा. इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और बाद में वह राज्यसभा सांसद बनीं.उनके सांसद बनने के बाद पवार परिवार में कुल तीन सांसद और दो विधायक हुए. लेकिन अजित पवार के निधन के बाद आगे क्या होगा? इस मुद्दे पर चर्चा के बीच, यह मांग उठ रही है कि अजित पवार के राजनीतिक खाते राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पास रखे जाएं और पार्टी का नेतृत्व सुनेत्रा पवार को सौंप दिया जाए।

सुनेत्रा पवार धाराशिव ज़िले की रहने वाली हैं. वह एनसीपी के वरिष्ठ नेता पद्मसिंह पाटिल की बहन हैं. सुनेत्रा पवार का बचपन धाराशिव के टेर में बीता.सुनेत्रा पवार ये कहती रही हैं कि राजनीति और सामाजिक कार्य के प्रति उनका जुनून उनके पिता से उनमें आया, जो एक स्वतंत्रता सेनानी और गांव के रसूखदार व्यक्तियों में से थे।


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