Header Ads

test

पवैया बता सकते हैं सब्र के फल का स्वाद !

ग्वालियर:-@ राकेश अचल


सब्र के फल का सही स्वाद इन दिनों अगर कोई सही बता सकता है तो वे हैं कुंवर जयभान सिंह पवैया. 70 साल के कुंवर जयभान सिंह पवैया जिस सिंधिया घराने के खिलाफ खम ठोंककर राजनीति में चमके थे आज उसी घराने की छत्र छाया में कोई 8  साल का वनवास काटकर मप्र वित्त आयोग के अध्यक्ष बनकर वापस लौटे हैं. एक तरह से कहूं तो उन्हे पार्टी ने सब्र का फल दिया और उनको शेष बुढापा ढंग से काटने का इंतजाम कर दिया।

मुझसे कोई तीन साल बडे जयभान सिंह पवैया को मैने राजनीति की पहली सीढी चढते देखा है. वे सरकारी मुलाजिम होते हुए भी बजरंग दल के बजरंगी थे. कायदे से पवैया जनवरी 1998 में अटल जी की प्रेरणा से कांग्रेस के दिग्गज नेता स्व. माधवराव सिंधिया के विरुद्ध ग्वालियर से पहला चर्चित व रोमांचक लोकसभा चुनाव लड़े, जीते नहीं लेकिन उन्हे हारकर भी जीता माना गया क्योंकि उन्होने लाखों मतों से जीतने वाले सिंधिया की जीत को 25 हजार पर लाकर खडा कर दिया था. सिंधिया बाद में कभी ग्वालियर नहीं लौटे. वे गुना से चुनाव लडते रहे।

पवैया को अगले ही साल 1999 मे 13 वीं लोकसभा हेतु ग्वालियर से संसद सदस्य चुन लिया गया. कुंवर जयभान अपने नकचढेपन की वजह से दोबारा संसद की सीढियां नहीं चढ सके. हमेशा लकधक और कलफ न टूटने वाले वस्त्र पहनने वाले जयभान सिंह की संघ के प्रति असंदिग्ध निष्ठा और अग्निमुखी भाषण शैली की वजह से  पार्टी लगातार सम्मान देती रही।

पवैया ने सिंधिया विरोधी तेवर बनाए रखने के लिए वर्ष 2000 में "वीरांगना लक्ष्मी बाई बलिदान मेला आयोजित करना शुरू किया. इस मंच से  उन्होंने  ‘‘राष्ट्रीय वीरांगना सम्मान " स्थापित किया।. जो हर साल सिंधिया परिवार को गरियाने के काम 2020 तक काम आया जब तक कि ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद भाजपा में शामिल नहीं हो गए।

पवैया के खाते में जय-पराजय के अनेक किस्से दर्ज हैं. वे वर्ष 2003 चिली के सेंटिआगो में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संसदीय संघ  के 108 वें अधिवेशन में "आतंकवाद" विषय पर हिन्दी का पहला भाषण देने वाले भारतीय बने.वर्ष 2005 में तत्कालीन बाबूलाल गौर सरकार ने पवैया को  मध्यप्रदेश में राज्य बीस सूत्रीय क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष बनाया. वे 2013 तक इस पद पर रहटर मंत्रि स्तरीय सुख भोगते  रहे।   जयभान सिंह पवैया 2013 में ग्वालियर से विधायक चुनें गये व 30 जून, 2016 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रि-परिषद में उच्चशिक्षा मंत्री के रूप में शामिल किये गये।

बाद में जयभान को जब टिकट मिला तो वे हार गए और कभी उन्हे टिकट ही नही मिला. पार्टी ने पवैया का मन रखने के लिए वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली राज्य के सह प्रभारी का दायित्व सौंपा. वर्ष 2020 से महाराष्ट्र के सह प्रभारी भी बनाए गए।

पवैया के अपने समर्थक हैं, प्रशंसक हैं. लेकिन अब उनकी नाव चुनावी वैतरणी में उतरने लायक नहीं रही तो पार्टी हाईकमान ने उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हे मप्र की मोहन सरकार में वित्त आयोग का उपाध्यक्ष मनोनीत करा दिया. पवैया को सब्र का और सिंधिया विरोध त्यागने का फल मिला है. पवैया को मै भी बधाई देता हूँ।


कोई टिप्पणी नहीं