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सोने एवं चांदी के रथों में सवार होकर निकली श्रीजी की रथयात्रा

गजरथ यात्रा को देखने उमड़ी भीड़, पंचकल्याणक महोत्सव का समापन

लगातार 6 दिन तक की गई हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा

शिवपुरी:-



 पिछले 6 दिनों से चल रहे पंचकल्याणक एवं गजरथ महोत्सव का 10 दिसम्बर शुक्रवार को विश्वशांति महायज्ञ एवं गजरथ यात्रा के साथ समापन हो गया। पाषाण से भगवान बनने के इस अनूठे कार्यक्रम में भगवान आदिनाथ, भगवान भरत, भगवान वासपूज्य, भगवान मुनिसुव्रत, भगवान महावीर की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित होकत पूज्यनीय हो गईं। जिन्हें जिनालय में विराजमान किया गया। इस महामहोत्सव में गजरथ में 3 गजरथों ने पांडाल के सात चक्कर लगाए। इस दौरान जैन श्रद्धालुओं के साथ हजारों की संख्या में अन्य समाज के लोग भी उपस्थित रहे। ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग गजरथ देखने के लिए अयोध्या नगरी गांधीपार्क मैदान पहुंचे। इस दौरान नगर के सभी पत्रकार बंधुओं का सम्मान भी समिति द्वारा किया गया। उल्लेखनीय है कि इस गजरथ में अजमेर से शुध्दसोने का रथ एवं अशोकनगर से शुद्ध चांदी का रथ भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था के साथ शिवपुरी लाया गया, जिसमें  श्रीजी को विराजमान कर भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। साथ ही लगातार 6 दिन तक की गई हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। 




दोपहर 1:00 बजे विशाल गजरथ यात्रा का शुभारंभ किया गया। गजरथ यात्रा में सबसे आगेे ऐरावत हाथी पर प्रमुख पात्र विश्व शांति का प्रतीक ध्वज लिए थे चल रहे थे। उनके आगे दिव्य घोष चल रहे थे। तीनों गजरथों में श्री जी की प्रतिमा को लेकर प्रमुख इंद्र सौधर्म, महा यज्ञनायक, राजा श्रेयांश, भरत चक्रवर्ती बाहुबली, यज्ञ नायक, ईशान आदि प्रमुख पात्र चल रहे थे। हाथियों पर धर्म ध्वजा लेकर श्री वीरेंद्र जैन पत्ते वाले, श्री चिंतामणि बीलारा, श्री देवेंद्र कुमार डिस्पोजल, श्री जिनेश जी चौधरी चल रहे थे, वहीं रथ सारथी बनने का सौभाग्य मुकेश जैन भंडारी, राकेश जैन आमोल, भीकमचन्द जैन आरआरबी, गजरथ सारथी प्रकाश चंद गंज वाले, जय कुमार जैन सिरसौद वालों को मिला।  रथों के आगे पूज्य मुनि श्री अभयसागर जी महाराज, मुनि श्री प्रभातसागर महाराज, मुनि श्री निरीहसागर जी महाराज व श्रद्धालु चल रहे थे। रथों के पीछे अष्ट कुमारियाँ, नाचती-गाती हुई चल रही थी। साथ ही महिला रेजीमेंट व समाज के दिव्यघोंषों के साथ श्रद्धालु नाचते-गाते चल रहे थे। सात परिक्रमा पूर्ण करने के बाद श्री जी की भव्य रथयात्रा प्रारम्भ हुई। 



भव्य रथयात्रा निकाली गई।


दोपहर ठीक 3:00 बजे, पंचकल्याणक स्थल से श्रीजी की भव्य रथ यात्रा प्रारंभ हुई, जो कस्टम गेट, निचला बाजार , सदर बाजार गांधी चौक, गुरुद्वारा, होकर पुरानी शिवपुरी जिनालय पहुंची, जहाँ पार्श्वनाथ भगवान की प्राचीन मूल प्रतिमा के साथ नवीन प्रतिमाओ को विराजमान किया गया। साथ ही मंदिर जी के शिखरों पर कलशारोहण किया गया। मूल प्रतिमा विराजमान करने का सौभाग्य श्री राकेश कुमार पवन कुमार जैन पुरानी शिवपुरी को प्राप्त हुआ। 



इस महोत्सव में शिवपुरी के अलावा कोलारस, बदरवास, लुकवासा, सिरोंज, अशोकनगर, गुना, आरोन, ईसागढ़, बामोर कलाँ, खनियाधाना, ललितपुर, ग्वालियर, भोपाल, इंदौर सहित देश के विभिन्न भागों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सभी कार्यकर्ताओं, पुलिस प्रशासन, पत्रकार बंधुओं और सहयोगी संस्थाओं के सम्मान का कार्यक्रम भी यहाँ आयोजित किया गया। आभार प्रर्दशन पंचकल्याणक के अध्यक्ष जितेन्द्र जैन गोटू द्वारा किया गया।


मनाया मोक्ष कल्याण महोत्सव

इससे पहले सुबह आदिनाथ प्रभु का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। जैसे ही मुनिराज को कैलाश पर्वत से निर्वाण प्राप्त हुआ, सम्पुर्ण शरीर कपूर की भांति उड़ गया मात्र नख और केश ही बचे रहे। जिनका देवों ने अंतिम संस्कार किया। यह क्रिया पंचकल्याणक के महायज्ञ नायक अजित कुमार सनतमार, पंकज जैन अरिहंत परिवार ने एवं अग्निकुमार देव बने, आनंद जैन गंज वाले, रतन जैन, पवन जैन लुकवासा वालों द्वारा सम्पन्न की।


इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री अभयसागर महाराज ने कहा कि आज समापन का दिन है, लगभग 6 वर्ष पूर्व जैसी जिनालय की परिकल्पना की थी, उसने साकार रूप ले लिया। और इस विशाल कार्यक्रम के सानंद संपन्न होने पर स्वत: ही यह एहसास होने लगता है, कि निस्वार्थ मन से कार्य किए जाने पर प्रभु भी आशीर्वाद देते हैं। फिर आचार्य श्री का आशीर्वाद तो दोनों हाथों से मिला ही था। और जहां आचार्य भगवन का आशीर्वाद होता है, वहां कार्य सानंद सम्पन्न होता ही है। जब कार्यकम सानंद सम्पन्न होता है,  ऐसे में अव्यवस्था, असुविधाएं तथा परेशानी चेहरे से गायब हो जाती है, और आत्म संतुष्टि तथा समर्पण का भाव आ जाता है,  


मुनि श्री प्रभातसागर महाराज ने कहा कि इतने बड़े आयोजन में छोटे से छोटे व्यक्ति का समर्पण बहुत मायने रखता है। कई लोग पँचकल्याक में आकर भी मात्र मौज मस्ती में लगे रहते हैं। भगवान के समोशरण में जाकर भी कुछ लोग राग-रंग में डूब जाते हैं। परिणामो को थोड़ा सा सुधार कर मौज मस्ती की क्रियाये जो तुम अन्य स्थानों पर करते हो, उनकी तरफ से मुख मोडक़र यदि धर्म कार्यों  में अपने मन को लगाकर थोड़ा सा मन को धोने का कार्य करो, तो संस्कार आपके जीवन में आते चले जायेेंगे। 


    मुनि श्री निरिहसागर जी महाराज ने कहा कि शिवपूरी वालों का तीव्र पुण्य का उदय था कि शिवपुरी वालों को पँचकल्याक के लिए आचार्य श्री का आशीर्वाद मिला, और मुनि संघ का सान्निध्य मिल गया। इतने बड़े आयोजन में  देखा गया, कि सभी अपना कार्य जिम्मेदारी तथा समर्पण के साथ कर रहे थे। इसी प्रकार का सर्मपण जब धर्म क्षेत्र में आता चला जाता है तो जीवन मे शांति आती चली जाती है।   जब पूर्ण एकता के साथ सब मिलकर कार्य करते हैं तो वह कार्य अवश्य सफलता को प्राप्त करता है।

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