कोकरोच पार्टी नहीं बनाते, बनते हैं
भारत का सत्ता प्रतिष्ठान विरोधी मानस "कोकरोच जनता पार्टी" के नाम से चलाए जा रहे डिजिटल आंदोलन से अभिभूत भले हों लेकिन वे नहीं जानते कि दुनिया के सिस्टम में कोकरोच कभी पार्टी नहीं बनाते, हां सियासत उन्हें पार्टी जरूर बना लेती है. भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारत के सोये हुए कोकरोचों को जगा दिया है।
ग्वालियर:- @ राकेश अचल
इस आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तक के रूप में अभिजीत दिपके हैं. वे एक राजनीतिक कम्युनिकेशन रणनीतिकार बताए जाते हैं और फिलहाल अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत ने 16 मई 2026 को कोकरोच जनत पार्टी शुरू की।
यह आंदोलन अचानक तब वायरल हुआ जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित “कोकरोच" टिप्पणी सोशल मीडिया पर फैल गई। जस्टिस ने बाद में सफाई भी दी लेकिन तब तक मीम और नाराज़गी का माहौल बन चुका था।
अब सवाल कि क्या यह भारत के सत्ताप्रतिष्ठान के लिए कोई “चुनौती” है?तो मुझे लगता है नहीं, ये कोई जमीनी आंदोलन नहीं है इसलिए इसे चुनौती के बजाय एक अलार्म माना आना चाहिए।
कई विश्लेषक इसे भारत की “जेन-जी डिजिटल नाराज़गी” का प्रतीक मान रहे हैं — खासकर बेरोजगारी,,महंगाई,पेपर लीक
,राजनीतिक अविश्वासयुवाओं की उपेक्षाजैसे मुद्दों पर ये डिजिटल आंदोलन पांव पसार रहा है.लेकिन अभी तक अभिजीत ने कोकरोच पार्टी को भारत मे बाकायदा पंजीकृत नहीं है.चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त पार्टी नहीं है,इसलिए ये एक राजनीतिक नहीं अपितु एक व्यंग्यात्मक/डिजिटल आंदोलन है,और इसकी ताकत मुख्यतः सोशल मीडिया व मीम संस्कृति में दिख रही है
अच्छी बात ये है कि , इतने कम समय में भारत में लाखों–करोड़ों फॉलोअर्स जुटाना यह दिखाता है कि युवाओं के बीच असंतोष और राजनीतिक व्यंग्य की जमीन बहुत बड़ी है.लेकिन मै इसे पारंपरिक राजनीति के लिए “डिजिटल चेतावनी” से ज्यादा कुछ नही है.सोशल मीडिया पर वायरल दावों के मुताबिक कोजपा के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स बहुत तेजी से बढ़े हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या करीब 1 करोड़ बताई जा रही है.
कोकरोच जनता पार्टी यदि तमिलनाडु मे दलापति विजयन की भांति युवाओं के गुस्से को वोट में बदल सके तो बात और है.
फिलहाल मै कोकरोच स्क्रीन तक सीमित हैं।

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